समाज द्वारा संचालित होने वाली भावी गतिविधियाँ एवं सेवाकार्य
वर्ष 2016 से हर वर्ष भगवान श्री विश्वकर्मा के पूजन दिवस 17 सितम्बर को हवन / पूजा का आयोजन किया जाता है साथ ही वर्ष 2025 से हर वर्ष इसी दिन प्रतिभा एवं शिक्षा भूषण सम्मान का कार्यक्रम किया जाता है जिसमे क्षेत्र के 40 गाँवों के विद्यार्थी चाहे वो कहीं भी अध्ययन करते हो उन्हें शिक्षा / खेलकूद में उम्दा प्रदर्शन करने वाले छात्र / छात्राओं , नव चयनित सरकारी कर्मचारियों / अधिकारीयों का सम्मान किया जाता है |
आदि काल से माघ शुक्ल त्रियोदशी को आदिदेव, शिल्पाचार्य, सृष्टि रचियता भगवान श्री विश्वकर्मा की जयन्ती के रूप में मनाया जाता रहा है , समाज में जयन्ती की पूर्व संध्या पर भजन / सत्संग का आयोजन किया जाता है और दुसरे दिन हवन , पूजा अनुष्ठान कर भगवान श्री विश्वकर्मा की बैंडबाजो के साथ शहर के विभिन्न रास्तों से होते हुए शोभा यात्रा निकाली जाती है | साथ ही भगवान की महा प्रसादी का भी आयोजन किया जाता है |
समाज के प्रतिभाशाली उमन्दा छात्र /छात्राओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने के लिए छात्रवृति योजना प्रस्तावित है जिसकी विस्तृत योजना बनाई जा रही है जो छात्र /छात्रों के भविष्य की राह तय करने में प्रभावशाली भूमिका निभाएगी |
निकट भविष्य में क्षेत्र में समाज के सामूहिक विवाह के आयोजन से निम्न आय वर्ग को लाभ मिले इस हेतु प्रयास किए जायेंगे |
समाज में युवाओं को रक्तदान करने हेतु प्रोहत्साहित किया जाएगा, इस हेतु समय समय पर रक्तदान शिविरों का आयोजन किए जाएंगे |
समाज में सामूहिक स्वास्थ्य जांच शिविरों का आयोजन कर समाज के आम व्यक्ति को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने की श्रेष्ठा की कयेगी |
समाज में समय समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर अपनी संस्कृति और अतीत का प्रचार-प्रसार करना , और उसे संजोये करने हेतु प्रयास करना हमारा कृतव्य है , समय के अनुरूप ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करना अनिवार्य है |
समाज में सामजिक कुरितियों का शमन करना , उन पर अंकुश लगाना , उसमें सुधार करना, आज समय की आवश्यकता बन गया है , जिसके प्रयास समाज द्वारा समय समय पर किए जाते रहे है ओर भविष्य में भी इस पर मंथन कर आधुनिकता के साथ परम्परागत रीति रिवाजों को बेहत्तर विकल्प के रूप में अपनाने के प्रयास किए जाएंगे |